शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

सफर


 


सड़क के दोनों तरफ हरियाली होती है तो सफर खुद ब खुद ख़ुदा हो जाता है |

सड़क के एक तरफ पेड़ पौधे लताएं पत्ते दिख जाने पर भी, आबोहवा सुकूनदायक, खूबसूरत और आनंदमय हो जाता है कुछ परिमाण ...
पर
यही सफर वीराने और सूखे से होकर गुजरता है जब, तब गुजरे दिनों की ठंडक , ख़ूबसूरती और ख़ुदा को बक्से से बाहर बुलाकर खुद को चमत्कार दिखाना होता है |

चमत्कार !! ??

दिखता बंद आँखों से जो ,
चिड़ियों के कलरव सा स्पर्श ...
ओस से भीगी टेबिल, कुर्सियां जो रात भर गपशप में बाहर रहकर चांदनी की सिसकियों में डुबकी लगाती रही हो ...
अखबार के पन्नों पर नहीं आ पाने वाली बेखौफ़ खबरों की आज़ाद हँसी ...
कोयले के देह को छूती लहराती लिपटने को आतुर नारंगी लौ ...

मेरी मुक्ति ने अभी नवयौवना का रूप लिया भर ....

- निवेदिता दिनकर
२६/०२/२०२१

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