गुरुवार, 30 जुलाई 2015

कलाम सर



कलाम सर,
पहली बार ऐसा हुआ है , जब हर धर्म की मानव जाति , हर पार्टी का राजनेता, कोई भी आयु वर्ग, स्त्री, पुरुष , बच्चे, शिल्पकार, साहित्यकार , डॉक्टर , वैज्ञानिक या कुछ और, प्रत्येक जन मानस , आपके लिए दिल से रोया है। 

कहते है, अगर जानेवाला घर गृहस्थी वाला है, तो उसके लिए उसका पूरा परिवार शोकाकुल होता है, परन्तु आप तो ऐसे जादूगर निकलेप्यार के इतने धनी निकले जिसने पूरे राष्ट्र को एक सूत में बाँध दिया। 

इस सन्दर्भ में एक वाक़या याद आ रहा है । 
माँ शारदा ने एक बार स्वामी राम कृष्ण परमहंस से कहा कि मुझे अफ़सोस है कि मुझे माँ कहनेवाला कोई नहीं है। इस पर स्वामी जी कहते है कि इस बात की आप बिलकुल चिंता नहीं कीजिये, आपको पूरा जगत माँ पुकारेगा।

सर, आपको मेरा शत शत प्रणाम । आज, कल और हमेशा      

निवेदिता दिनकर   
 30/07/2015

नोट : पेंसिल स्केच की एक अदना सी  कोशिश 

1 टिप्पणी:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (31.07.2015) को "समय का महत्व"(चर्चा अंक-2053) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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