गुरुवार, 27 जुलाई 2017

तेरे बिना





आज 'सिन्दूरी शाम' मासूमियत के रंगो में लिपटी ऐसे ज़मीन पर उतरी कि 
उसकी चमक उसकी रौशनी उसकी बंदगी, बेहाल कर गई |  

हुआ यूँ कि  सड़क पर विचरण करने वाले मेरे चार दोस्त , प्यारे श्वान, में से दो, अपने भोजन के लिए मेरे घर के सामने एकत्र हुए तो देखा देखी एक गाय माते भी आ पहुँची और फिर जम कर "पहले मैं " "पहले  मैं " का नारा लगाते हुए मिलजुल कर रोटी खाने लगें, पानी पीने लगें | 

डार्विन जी की थ्योरी सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट, स्ट्रगल फॉर एक्सिस्टेंस भी कामयाब दिख रही थी| 
नज़ारा बेहद दुर्लभ था, बिना उनसे सहमति लिए, खूबसूरत तस्वीर लूट लिए | 

दिल की ख़ुशी देख दिमाग सवालों में उलझ गोता लगाने लगा कि हम मिलजुल कर रोटी कब खाएँगे ?  

तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई
शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं
     
 - निवेदिता दिनकर 
  २७/०७/२०१७ 



 
 

मंगलवार, 25 जुलाई 2017

मुठ्ठी भर ...





कुछ बातों / खबरों से मैंने अपने अंदर अवसाद को उतरते महसूस किया है | वह खबर, हादसा , घटना कभी कभी मेरे अंदर इतना लाचारी भर देती है, कि मुझे अपने आप से ही कष्ट होने लगता है | जरूरी नहीं, वह घटना मेरे साथ या  मेरे अपनों के साथ घटी हो पर बस बेबस कर जाती है | 

ऐसे में गीतों या फिल्मों या अपनी पालतू डॉगी या कुछ और डॉगी जो सड़क पर घुमते है और लगभग पालतू नुमा से हो गए है से बड़ा सहारा मिलता है | 
कभी तो  हवा में ही कुछ भाव कच्चा पक्का उकेर देती हूँ और सुकून पा लेती हूँ | अब हर वक़्त कागज़ कलम तक पहुँचना कहाँ हो पाता है | 

माँ बताती है , बचपन में राह चलते कुत्ते के बच्चे , बकरी के बच्चें, चिड़ियों  के बच्चे घर में उठा लाती थी और माँ से ज़िद करती थी कि इनको पाल लो | 
आसपास के घरों में अब कहीं  मेरी बचपन वाली रज़िया आंटी नहीं दिखती , न ही पाठक आंटी , न ही गोयल आंटी न ही कुलवंत आंटी बल्कि आस पास जाति और मज़हब और सोच दिखती है  या दिखती है फॉरेन रिटर्न्ड या मर्सिडीज़/ बी एम् डब्लू वाली कोठी या ए सी/ विदेशी / स्वदेशी के मद से प्रदूषित होता वातावरण | 

ओह ,  कब तक ...     चलो एक बार फिर से ...           ~ ~ ~
 गुफा, नदी , झील , प्रकृति और प्रकृति  ...  
पाषाण युग कैसा रहेगा ??

बस, मुठ्ठी भर  ...  

- निवेदिता दिनकर 
  २५/०७/२०१७
फोटो : एक मुठ्ठी शाम, लोकेशन आगरा , ताज महल के पास