गुरुवार, 18 जनवरी 2018

आह! ऐतिहासिक जगाधरी...





एक ऐसी भी ख्वाहिश है कि हर रात एक नये शहर में गुजरे। 
हर शहर की एक अलग फ़िजा। 
फ़िजाऐं बता देती है फितरतें। 
देह लिए होती है और होती है उसमे एक उन्मादी गंध | 
महसूस किया है मैंने |

सड़कों पर,
दरख्तों पर, 
ईटों पत्थरों पर,
तिलस्मी कहानियों का ज़खीरा सोया हुआ है, एक आहट के इंतज़ार में। 


आज ' रात ' चाँद तारों के साथ अलाव जलाकर कुछ गपशप करने की फिराक में है। 

श श श ... 

- निवेदिता दिनकर
 18/01/2018


सोमवार, 15 जनवरी 2018

दरवाज़ा


बहुत खूबसूरत थी | भूरी भूरी आँखें , काँधो पर गिरते मुलायम चमकीले बाल | पढ़ने लिखने में भी सबसे अव्वल, पर थी एकदम भोली | 
आजकल की लड़कियों के लिए बोला जाता है कि बड़ी चालाक होती है और उनको कम नहीं समझना चाहिए | 'मिष्टी ' सचमुच में मिष्टी थी | एक दम रोसोगोल्ला | कोई चतुराई  नहीं |    
एक अच्छे पब्लिक स्कूल से बारहवीं और बोर्ड में ९७% मिलना कोई आसान तो नहीं | कानपुर से सीधे दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए रवाना और सबसे नामचीन कॉलेज में दाखिला | 

बहुत खुश थी, मिष्टी | सोशियोलॉजी ऑनर्स मिल गया था बल्कि जहां ही मिल गया था | आई ए एस की तैयारी के लिए परफेक्ट सब्जेक्ट | नया कॉलेज, नए दोस्त , सब कुछ अच्छा अच्छा | इस दिन के लिए तो वह कब से शारीरिक और मानसिक यतन ले रही थी |  

एक बार एक पार्टी में जाना हुआ और वहाँ  मिष्टी के साथ 'ऐसा' हो गया कि वह अपने में घुटने लगी | धीरे धीरे वह बिलकुल चुप होती गयी | एकदम खामोश | छुप छुप कर रोती | मगर अपने दोस्तों के सामने बिल्कुल सहज जैसे कुछ भी न हुआ हो | 
मिष्टी को समझ नहीं आ रहा था अपनी बात किससे साँझा करे ? 
घर में एक दीदी है मगर डरती है कि कैसे बताये ? माँ को तो बिलकुल भी नहीं |  

उसे एक दोस्त याद आया  जिसे वह कानपुर से जानती थी | अपने साथ हुए हादसे को उस दोस्त को  बताना उचित समझा |  बड़ी ही मुश्किल से मिष्टी बता पाती है कि एक पार्टी में कोल्ड ड्रिंक्स में कुछ नशीली गोलियाँ डालकर उसे पिला दिया  गया था  और  फिर उसके साथ गलत काम हुआ | बहुत झिझकते , घबराते हुए कह पाती है, उसका रेप हुआ है | 

मिष्टी अपने दोस्त को बताती है  कि उसे समझ नहीं आ रहा है अब वह क्या करे? वह इस बात को भूलना तो चाहती है पर उसे गिल्टी  महसूस हो रहा है | उसे अपने से नफरत हो रही है | 
उसके दोस्त ने बड़े ही पेशेंस के साथ उसकी बात सुनी | उसने कहा कि ' तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ है लेकिन मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊँगा ' | मिष्टी ने पूछा कि ऐसा क्यों ?

तब उस दोस्त ने जो बताया मिष्टी के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी | उस दोस्त ने बताया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे जिंदगी से कोई लगाव नहीं है |

उसका रेप हो चुका है, चार बार | उसके माँ की ही सहेली ने उसका रेप किया है जब वह केवल  १५ साल का था |
और यह बात उसके माँ को भी मालूम है | 

मिष्टी सोचने लगी कि क्या पुरुषों का भी रेप हो सकता है ?  क्या पुरुष भी सताये जाते है? पुरुष आखिर मदद के लिए कहाँ जाये?


दरवाज़ों के पीछें से चीख किसी की भी हो सकती है | टार्चर कोई भी हो सकता है | दर्द का कोई लिंग नहीं होता

- निवेदिता दिनकर 
  15/01/2018

  तस्वीर : मेरे क़ैमरे से , एक पुरानी हवेली का पुराना दरवाज़ा , लोकेशन : आगरा 

शनिवार, 6 जनवरी 2018

एक सच्ची ख्वाहिश ...




अपने को शीशे में देख कर शर्माना अच्छा लगता है | 
कनखियों से उनका देखना अच्छा लगता है ||

गर अगर भूल भी जाओ हमें एक बार |
हमें तो तन्हा  रहना अच्छा लगता है ||

चाँद तारें न भी निकले गर रात भर |
हमें अँधेरा चीरना अच्छा लगता है ||

ठिठुरती रात में अलाव जले या न जले |
हमें तो रफ्ता रफ्ता गलना अच्छा लगता है || 

तुम रूठ भी जाओ गर हमसे ऐ सनम |
लब तुम्हारे छूने का बहाना अच्छा लगता है || 

इस ज़िन्दगी से रुख्सत कब हो क्या पता | 
तुम्हारे प्यार में फ़ना होना अच्छा लगता है ||  

- निवेदिता दिनकर 
  ०५/०१/२०१७ 

महफ़िल : मेरी तुम्हारी

बुधवार, 15 नवंबर 2017

चितकबरी








रंगों से छेड़छाड़ करना , आत्मिक हो जाना , आत्मा से  मिलन हो जाना या एकाकार ...         | 
खूबसूरत थेरेपी और अपनेआप घाव भरने लगते हो, जैसे | एक प्रकार का सेडेटिव है या एनाल्जेसिक यह तो नहीं पता , पर नशेमन हो जाना होता है | 
जब दिमाग़ खाली हो तो रंग भरो | 
और 
जब दिमाग में रंग हो तो खाली करो | 

बेसुध होना, तब्दीलियाँ पाना , या चितकबरी और चितकबरी ...  बेमालूम | 

 पिछले पाँच दिनों में रंगों से खेलने के बाद का दिलचस्प और सुकून से भरा नज़ारा | आइये , मेरी रंगों की गलियों में गुनगुनाते हुए गुज़रिये। ... 

ओ मेरे दिल के चैन 
ओ मेरे दिल के चैन चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिये ... 

अपना ही साया देख के तुम जाने जहाँ शर्मा गए 
अभी तो यह पहली मंज़िल है, तुम तो अभी से घबरा गए  
मेरा क्या होगा, सोचो तो ज़रा ... 

हाय ऐसे न आहे भरा कीजिये 
ओ मेरे दिल के चैन ... 

सचमुच , यह दिल के चैन ही तो है | बेतहाशा पागलपन इस ज़िन्दगी में , रंगो के ज़रिये कितना संपन्न करती है | कभी नहीं जाने देना यह नज़र , ज़िन्दगी की शाम आ जाए पर इन रंगों की शाम कदापि नहीं | 
मोहब्बत है तेरे से, ऐ रंग | 
शामिल कर ले तेरे में, ऐ रंग ||   

- निवेदिता दिनकर 
  15/11/2017

तस्वीरें : आओ , मेरी गली ...

सोमवार, 25 सितंबर 2017

रईस







#रोडडायरीज

कल की बात है |
वैसे कोई ख़ास बात भी नहीं 
एकदम साधारण सी, समझ लीजिये ...   

महज बीस साल का, 
वह बालक 
कुछ भी, कैसा भी, कहीं भी काम करने को तैयार  

बस, दिहाड़ी मिल जाए  ... 

पूछा, कुछ पढ़े हो ?
उसने मेरी ओर देखा और चेहरे पर तिरछी मुस्कान तैर गई 

मैं समझ गयी. 'जवाब'...  

पूछा, नाम क्या है? 
एकदम तपाक से बोला ... मुसलमान हूँ | 
पूछा, तो?
नाम नहीं रखे जाते ?

अब थोड़ा सहज हुआ 
"रईस"

माहौल को थोड़ा हल्का करने के लिए पूछा , रईस फिल्म देखी ?
शाहरुख़ पसंद है ? पता है, कितना स्ट्रगल किया है?
रातों रात कोई चीज़ नहीं मिलती | मशक्कत करनी पड़ती है | 
"हाँ" में सर हिला देता है |   

कहता है, मम्मी और बड़े भाई सब्जी बेचते है | 
पापा एक्सपायर हो चुके है| 
घर की हालत अच्छी नहीं है  ... 

कोई बात नहीं, हर संडे मेरे पास दो घंटे आया करो 
बुक्स कॉपी की फ़िक्र मत करना। ... 

बड़े ऐटिटूड के साथ बोला , 'इतना तो है' | 

मैंने बोला, परफेक्ट ... 

फिर बोलता है, पापा अगर जिन्दा होते, माँ घर में रहती, तो मैं क्यों स्कूल नहीं जाता ?

सच ही तो है | 
लेकिन, उस जैसे  अनेक मुरझाऐ बच्चों में जान फूंकना है, सो लगी हूँ और लगी रहूँगी | 

- निवेदिता दिनकर  

तस्वीर : उर्वशी दिनकर 

रविवार, 24 सितंबर 2017

रजनीगंधा बनाम रजनीगंधा



फूलों की दुकान थी |
मेरी आँखे जिसको ढूँढ रही थी , वह नहीं था तो सोचा जो दस ग्यारह साल का लड़का सामने खड़ा है, उस से ही पूछ लेती हूँ , "रजनीगंधा है ?"
जवाब था " रजनीगंधा तम्बाकू "
मुझे चुप देखकर, बोला ," बराबर में जो पान की दुकान है, वहाँ मिल जाएगी |"
दिमाग में सन्नाटा छा गया ...
बाद में पता चला , उसे रजनीगंधा फूलों के बारे में सचमुच पता नहीं था |
अभी भी सकते में हूँ |

- निवेदिता दिनकर 
  24/09/2017




बुधवार, 20 सितंबर 2017

प्रेम


পাগলা হাওয়া 
মাটির ছোঁয়া ... 
রজনীগন্ধার স্নিগ্ধ  সুগন্ধ 
চাঁদের বোনা ... 
আঁচলে নদী 
মুঠিতে আকাশ  ... 

শুনছো,

 হৃদয়ে একটি প্রেম কাহিনী ভাসছে  ... 

-  নিবেদিতা দিনকর  
    18 /09 /2017 

उन्मादी हवा 
मिटटी में लिपटी  ... 
रजनीगन्ध की भीनी सुगंध 
चाँद का बुना ... 
आँचल में नदी 
मुठ्ठी में आसमान 

सुन रहे हो,
 मर्म में एक प्रेम कहानी तैर रही है  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  १८/०९/२०१७ 

प्रिय मित्रों, 
अपनी मातृभाषा बांग्ला में लिखने की कोशिश किया है और साथ में हिंदी में अनुवाद भी | आशा है, आप अपनी टिप्पणियों से मुझे उत्साह और न्याय देते रहेंगे | 

आपकी मित्र