गुरुवार, 13 सितंबर 2018

लघु प्रेम कविता ५




प्रेमिका
से
पत्नी,
पत्नी
से
माँ ...
बनी थी जब ...
और
तुम ...
वह करुण चेहरा
अबोध बालक पन
निरुपाय
असमय ...
हे स्थिति,
तुम मुझे ' शून्य ' कर गयीं
एक पूर्ण विराम ...
"समाधिस्थ" 
- निवेदिता दिनकर
१०/०९/२०१८
#लघुप्रेमकविता५


झुमकी की एक मोहक पेंटिंग 

बुधवार, 12 सितंबर 2018

लघु प्रेम कविता ४







मुझे अकेले छोड़ कर
तुम्हारा
मात्र 
बाहर जाना
भी ...
जाने क्यों खलता है अब ...

" दे हैव बीन टुगेदर फिफ्टी ऐट इयर्स नाउ "
- निवेदिता दिनकर
  10/09/2018

सोमवार, 10 सितंबर 2018

लघु प्रेम कविता ३


मेरी पीठ से तुम्हारी पीठ
का 
यह
पुल ...

एक 'पीठ' है |

- निवेदिता दिनकर
  09/09/2018
#लघुप्रेमकविता३

रविवार, 9 सितंबर 2018

#लघुप्रेमकविता२



यह जो
तुम
मुझे 
छंद बंद
में
बाँधते
हो ...
या
रस, अलंकार
में
डूबोते
हो ...
क्या ऐसे 'अवरोध' प्रेम है ?
- निवेदिता दिनकर
  09/09/2018

शनिवार, 8 सितंबर 2018

लघु प्रेम कविता १



कभी प्यार ने सफोकेट किया है?
मेरा उत्तर 'हाँ' में था ...
बिलकुल
उस गैस चैम्बर में जा रहे कैदी की तरह ...
मगर
प्यार तो,
बंधनमुक्त होता है |
पर
उसका प्यार
'होलोकॉस्ट' था ...
- निवेदिता दिनकर
  08/09/2018

बुधवार, 29 अगस्त 2018

कुछ लोग कभी जाते नहीं ...




चाय की चुस्कियों में
और
महफ़िलों की चुप्पियों में ठहरे रह जाते हैं।
वे घास पर पड़े बारिश के
वह
बूढ़े बूँद है
जो धूप निकलने पर भी ठहरे मिलते है।
तकिये पर पड़े तेल के निकम्मे निशान कभी भी जा पाएं?
और
कंप्यूटर टेबल
पर
बेतरतीब आड़े तिरछे लहराते डिटेल्स
शिराओं में सिरिंज का काम करते हैं।
कुछ लोग कुहूकते रहें...
कुछ लोग कभी न जाए... -
- निवेदिता दिनकर

फोटो क्रेडिट्स : दिनकर सक्सेना , लोकेशन: लेह 



रविवार, 22 जुलाई 2018

एक माँ का सपना



दोस्तों, अर्ज़ है, पोस्ट् आखिर तक पढ़े ...
बिटिया का बी टेक में एडमिशन हो गया है , कंप्यूटर साइंस ब्रांच में |
यह बेहद ख़ुशी की बात है | हम बहुत ही प्रसन्न है |
२०१७ में उ प्र बोर्ड से ७६ प्रतिशत नंबर , फिजिक्स , केमिस्ट्री , मैथमेटिक्स लेकर, बिलकुल भी आसान नहीं | वह भी कोचिंग, टूटोरियल के बिना, अपने दम पर | वैसे कोचिंग लेना कोई बुरी बात नहीं , पर कुछ घर की मजबूरियों के चलते नहीं बन सका | समय समय पर बच्चों से संपर्क बनाये रखना ज्यादा जरूरी है सो मोटिवेशन, बातचीत का जरिया लगातार चलता रहा |
अच्छे नम्बरों की वजह से उ प्र सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप भी मिल गया |
वैसे तो २०१७ में भी बी टेक में एडमिशन मिल जाता, मगर इंजीनियरिंग डिप्लोमा में दाखिला लेना पड़ा | इलेक्ट्रिकल में | कमाल की बात यह रही कि कॉलेज के सारे ब्रांचेज में, फर्स्ट सेमेस्टर में बिटिया ने ही टॉप किया |
तो इस साल ठान लिया गया किअब बस |
बी टेक के दाखिले के लिए ... और मशक्कत रंग लायी , आगरा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में आखिरकार दाख़िला मिल गया |
बिटिया की माँ यानि मेरी गृह कार्य सहायिका का सर गर्व से ऊँचा और साथ उसका पूरा परिवार बेहद खुश और निश्चिन्त |
शुरुआती रुपये पैसे , जो भी लगे , दे दिए गए है | एक नेक काम ऐसा हमसे हो पाया , हम इसके लिए ऊपर वाले और सारे शुभचिंतको का दिल से आभार प्रकट करते है |
इस घटना से मन फूला नहीं समां रहा है ... एक माँ का सपना सच होते देख कर ...

- निवेदिता दिनकर
  २१ /०७/२०१८