बुधवार, 25 जनवरी 2017

बिछोह से प्रेम



हाँ, मुझे प्रेम पसंद है 
 
प्रेम में पड़ना भी 
और
 प्रेम को पढ़ना भी 
लेकिन 
सबसे ज्यादा पसंद 
 बिछोह

उस
'बिछोह' से 
शिद्दत से प्रेम है मुझे 

क्योंकि 
इसकी  
महक और चहक
धमक और गमक    
वेग और आनंद 
गूँज और गाँठ 

मुझे 
मीरा मय  
कर जाते है ... 

- निवेदिता दिनकर   
  

खूबसूरत शाम, ताज और एक दीवानी 

तस्वीरों में क़ैद करने की गुस्ताख़ी मेरी 









गुरुवार, 19 जनवरी 2017

उस दिन ...



उस दिन ...
  
उस दिन 
जैसे ही अपने 
हॉस्टल के रूम में घुसी 

मुझे मेरे 
रूम मेट ने 
इशारे से 
रूम की खिड़की 
के बाहर 
देखने को कहा 

मैंने ज्यों ही 
बाहर की ओर 
झाँका 

एक व्यक्ति 
हाथ हिला हिला कर 
भद्दे इशारे 
कर रहा था  ... 

जैसे ही 
मैं 
ज़ोर से चीखी 

"अबे, दो कौड़ी के" 
"तु वहीं रूक" 

सुनकर 
सरपट भागा  
ऐसे, जैसे 

भूत देखा हो ...

मेरी वह प्यारी रूम मेट
मिजोरम  
से, 
मेरे गले लग गयी 
 
बोली, 
थैंक्स मेरा साथ देने के लिए 


मैं कितनी देर उस से चिपकी रही, नहीं मालूम  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  १९/०१/२०१७ 

नोट : उपरोक्त घटना मेरे साथ घटी थी। 
मिजोरम में साक्षरता का दर भारत में सबसे ज्यादा ९१.०३% है और केवल नैन नक्श के आधार पर, कुछ अति इंटेलीजेंट लोग उन्हें भारतीय ही नहीं मानते ।    
यह तस्वीर मेरे द्वारा खींची गयी है , "पूजा की थाली" 

 

बुधवार, 4 जनवरी 2017

पूस की एक रात




हर रात एक कहानी बुनती हूँ 
या 
हर कहानी में एक रात बुनती हूँ  

मगर, 
आज की रात 
एक सर्द रात  
निस्तब्ध 
सफ़ेद 

अकेली   ... 
अधूरी  ... 
अलबेली  ... 
अनोखी  ... 
अलौकिक  ... 

हल्कू, जबरा
आज भी वैसे ही,  
 
बिलकुल भी नहीं बदले ...    

कुछ नहीं बदला  ... 
  
- निवेदिता दिनकर 
  04/01/2017

तस्वीर : मेरे द्वारा "पूस की अलौकिक रात", लोकेशन : आगरा  

शनिवार, 17 दिसंबर 2016

ज़िद्दी




ज़िद्दी ज़िद्दी ज़िद्दी 

हाँ हूँ 
यार, पगला जाती हूँ ...

आजकल 
बेकाबू टाइप हो जाती हूँ। 
कभी 
बहुत रोने का मन करता है |

अंदर सिसक रही हो जैसे  ... 
कच्चे घड़े को वापिस 
मिट्टी बनना हो वैसे  ... 

और
अब 

चीख चीखकर रोना चाहती है। 

रोने दो न  ... 
मिट्टी बनने दो न  ... 

- निवेदिता दिनकर  
  17/12/2016

तस्वीर : उर्वशी के आँखों देखी, लोकेशन : दिल्ली हाट  


रविवार, 11 दिसंबर 2016

प्यार में कभी कभी




जब मामूली हवा के झोकें के छुवन से सिहरन हो जाये , 
आप प्यार में है,
जब तन्हाइयों में अपने अंदाज़ से मुस्कान तैर जाये, 
आप प्यार में पड़े है, 
जब सामने से 'वो ' आ कर भी अपने में खोये रह जाये,
आप प्यार के परे है, 
  
जब आँच पर चढ़ी  भिन्डी जल कर ख़ाक हो जाये,
आप प्यार के सिरमौर है ...

- निवेदिता दिनकर 
  ११ /१२/२०१६ 

फोटो क्रेडिट्स : तुम्हारे लिए " दिन " मेरे दिल के आँखों से , लोकेशन मसूरी 

रविवार, 6 नवंबर 2016

मेरी नायिका - 6



कुछ दिनों पहले एक बच्ची " प्रीति " से मुलाक़ात हुई जो खूब बातें बनाती है, हँसती है, लड़ती है, मगर कमर के नीचे का हिस्सा शिथिल रहता है। उम्र १२ साल। बच्ची के पापा कहते है कि वह पैदा ही ऐसी हुई है। पापा सफाई कर्मचारी और माँ एक हॉस्पिटल में आया है। 
उस दिन उसको एक टेडी बियर और स्वीट्स दिया तो बहुत ही खुश हुई और अब मैंने उसको ड्राइंग शीट और कलर पेंसिल दिया .... और वह पढ़ेगी भी | 


क्यों मुस्कराती हो इतना, तुम?

और 
सब तिजोरियाँ भर कर भी 
कैसे 
मायूस 
है 
हम ...  

कैसे इतनी जान है, तुम में ?  

और  
कितने
खोखले  
बेजान 
है 
हम ... 

कैसे हँसती हो खिलखिलाकर, तुम?

और 
क्या कुछ न होते हुए 
भी 
ऐंठन   
के मारे 
हँस भी 
न पाते 
है 
हम ...

 वक़्त की तो फ़ितरत होती है करवट बदलने की, 
 क्या मालूम कब कौन सी करवट कोई जड़वत का कारण बन जाए 

सोचना जरा  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  ०६/११/२०१६ 

तस्वीर : प्रीती अपने टेडी के साथ 

मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

सुन रहे हो, न



सुन रहे हो, न 
आज फिर तुम पास नहीं हो 
और 
कल करवा चौथ है। 

यूँ तो ऐसी कोई बात नहीं ... 
मुझे तुम याद तो भरपूर आओगे 
परन्तु ,       
आज सवेरे की हमारी चाय
उफ़, 
जब
आधी चाय मैंने गुस्से में छोड़ दिया 
और 
तुम बस सोच में कि 
अब कैसे ?

अच्छा, पिछली रात की साथ लॉन्ग ड्राइव,
और हाँ ,
तुम्हारे फ़ोन पर 
मेरी नौ मिस्ड कॉल 
पूछने पर,
कि यार, मोबाइल साइलेंट पर था। 

जान बूझकर 
मुझसे टकरा कर निकलना  ... 
मेरे गालों के पास तक आकर, 
फिर 
कानों में कुछ भी फुसफुसा देना  ... 

बाथरूम में 
गीली तौलिया,
औंधा पड़ा तकिया, 
अखबार का बेतरतीब पूरे बिस्तर पर पसरे होना,

मेरे 
करवे में क्या कुछ नहीं है  ......  
 बस,
अब बारी तुम्हारी,  

चौथ क्या दोगे ?

- निवेदिता दिनकर 
  १८/१०/२०१६ 

दोस्तों के नाम सांझा  ..कुछ कभी न भूलने वाली हमारी तस्वीरें   <3