रविवार, 24 सितंबर 2017

रजनीगंधा बनाम रजनीगंधा



फूलों की दुकान थी |
मेरी आँखे जिसको ढूँढ रही थी , वह नहीं था तो सोचा जो दस ग्यारह साल का लड़का सामने खड़ा है, उस से ही पूछ लेती हूँ , "रजनीगंधा है ?"
जवाब था " रजनीगंधा तम्बाकू "
मुझे चुप देखकर, बोला ," बराबर में जो पान की दुकान है, वहाँ मिल जाएगी |"
दिमाग में सन्नाटा छा गया ...
बाद में पता चला , उसे रजनीगंधा फूलों के बारे में सचमुच पता नहीं था |
अभी भी सकते में हूँ |

- निवेदिता दिनकर 
  24/09/2017




2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (25-09-2017) को
    "माता के नवरात्र" (चर्चा अंक 2738)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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