बुधवार, 12 अगस्त 2015

तिरंगा



तिरंगे को देख 
जज़्बाती होना,
गर्व से माथे का उठना 
एकदम  स्वाभाविक … 

कितने गौरवशाली गाथाएँ, 
कितने कलेजे के टुकड़ों की कुर्बानियाँ, 
कितने धधकते अंगार,
कितने चरम पंथी  …
और 
कितने ही नरम पंथी  …

आसमान से ऊँची,
समुन्दर से गहरी,  
मेरा अभिमान,
मेरा स्वाभिमान,  
वन्दे मातरम   …
वन्दे मातरम  …

- निवेदिता दिनकर 
  12 /08 /2015 

फ़ोटो क्रेडिट्स : दिनकर सक्सेना , 'तिरंगा', लोकेशन : मदर्स वैक्स म्यूजियम , कोलकाता  

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.08.2015) को "आज भी हमें याद है वो"(चर्चा अंक-2067) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार भावसंयोजन .आपको बधाई

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  3. वन्दे मातरम
    बहुत सुन्दर भवोद्गार

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