बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

देवी


देखो,
कैसी सजी धजी, 
मुस्कराहट की चादर ओढ़े,
चलती फिरती,  
आलीशान  घरों में …  
दुबकी 
सहमी 
फीकी 
पीली  
"देवी''  
न, गलत मत समझना! 
शरीर पर एक दाग नहीं,
मगर …   

- निवेदिता दिनकर
  ०८/१०/२०१४  

दुर्गा माँ की तस्वीर उर्वशी दिनकर द्वारा खींची गई  

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (10.10.2014) को "उपासना में वासना" (चर्चा अंक-1762)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।दुर्गापूजा की हार्दिक शुभकामनायें।

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    1. मेरी रचना का लिंक देने के लिए आपका धन्यवाद राजेंद्र जी|

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  2. Bahut sunder ant ka magar sab bol gya ...umdaa rachna !! Mere blog par aapka swagat hai ....

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    1. Pari M Shlok जी, शुक्रिया, मेरे ब्लॉग पर आने एवं प्रोत्साहन भरें शब्दों के लिए|

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