बुधवार, 12 सितंबर 2018

लघु प्रेम कविता ४







मुझे अकेले छोड़ कर
तुम्हारा
मात्र 
बाहर जाना
भी ...
जाने क्यों खलता है अब ...

" दे हैव बीन टुगेदर फिफ्टी ऐट इयर्स नाउ "
- निवेदिता दिनकर
  10/09/2018

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (14-09-2018) को "हिन्दी दिवस पर हिन्दी करे पुकार" (चर्चा अंक-3094) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हिन्दी दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत ख़ूब ...
    अंतिम पंक्ति में पूरी रचना का सार है ...

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  3. बहुत ख़ूब ...
    अंतिम पंक्ति में पूरी रचना का सार है ...

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