सोमवार, 19 सितंबर 2016

तमन्ना



एक फौजी के दिल की बात, जब वह दूर बैठे अपने परिवार के लिए सोचता है  ...  

तमन्ना है,
कुछ लम्हें मिले ...
तमन्ना है,
कुछ लम्हें और मिले ...
तमन्ना है, 

कुछ लम्हें और साथ मिले ...
तमन्ना है,
कुछ लम्हें साथ साथ मिले ... 


- निवेदिता दिनकर
  १९/०९/२०१६


तस्वीर: उर्वशी की एक शानदार कलाकृति  

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (21-09-2016) को "एक खत-मोदी जी के नाम" (चर्चा अंक-2472) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं