रविवार, 20 मार्च 2016

दोस्ती के कितने रंग




दोनों एक बार फिर जन्में  ...

अधूरे थे 
पूरे हो गए ...

शायद 
कोई पुराना हिसाब बकाया था !!

- निवेदिता दिनकर 
   20/03/16 

सन्दर्भ : १६/०३/१६ को एक दुर्घटना में सचमुच हम( मैं और बनी) बाल बाल बचे  
तस्वीर : शैतानी करती "बनी", फ़ोटो क्रेडिट्स : उर्वशी दिनकर  

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-03-2016) को "शिकवे-गिले मिटायें होली में" (चर्चा अंक - 2289) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रंगों के महापर्व होली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. किसी दुर्घटना में बाल बचना नए जन्म से कम नहीं होता . पालतू प्राणी अपने घर के सदस्यों से किसी भी संदर्भ में अलग नहीं होते......कुछ न रिश्ता जरूर होता है इनसे इन अपने मूक प्राणियों से तभी तो हमें वे अजीज लगते हैं ...
    होली की शुभकामनाएं!

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  3. शुभ सन्देश...रंगोत्सव की शुभकामनयें...

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