गुरुवार, 22 जनवरी 2015

दो तोते




बेचैन सर्द हवा,
सीली सीली फ़िज़ा, 
गुफ्तगू करते 
चैन से 
दो तोते, 
एक उजड़ी शाख पर … 
और 
बेगाने से 
हम 
बहसो तमहीस के 
तिलस्म 
में 

 - निवेदिता दिनकर 
   २२/०१/२०१५ 
आज की तस्वीर मेरी आँखों से …"दो तोते" देख कुछ उमड़े ख्याल


3 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (24-01-2015) को "लगता है बसन्त आया है" (चर्चा-1868) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. छोटी पर प्रभावी रचनाआर्दिक बधाई।

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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