सोमवार, 27 मार्च 2017

प त झ ड़


अरे ऐ, 
पतझड़ की दुपहरिया
शाखों से पत्ते क्या गिरे
तूने तो मेरे धड़कन की जमीं रंग दिया
लगता है,
रक्त ने भी रंग बदल लिया होगा ...

- निवेदिता दिनकर
२७/०३/२०१७

तस्वीर : मेरे द्वारा क़ैद "प त झ ड़"

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (30-03-2017) को

    "स्वागत नवसम्वत्सर" (चर्चा अंक-2611)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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