शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

हे प्राणप्रिय


केवल व्यंग्य के तौर पर … Nothing personal about it!! wink emoticon smile emoticon

हे प्राणप्रिय, 
यह जो मेरा और तुम्हारा रसायन शास्त्र ( केमिस्ट्री) है ,
वह भौतिक ( फिजिक्स) से कहीं ज्यादा है परन्तु गणित ( मैथमेटिक्स ) से थोड़ा कम । 
मगर इतिहास (हिस्ट्री) गवाह है कि भूगोल ( जियोग्राफी) के आधार पर समाज शास्त्र (सोशियोलॉजी ) की गुणवत्ता को मद्देनज़र रखते हुए अर्थ शास्त्र ( इकोनॉमिक्स ) को नज़र अंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यहीं राजनीति ( पोलिटिकल साइंस ) है और आज का पर्यावरण ( Environmental Studies ) भी॥ 

तुम्हारी
...  ... .....

-  निवेदिता दिनकर 
तस्वीर: झील के किनारे , लोकेशन नौकुचियाताल   

1 टिप्पणी:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (22-02-2015) को "अधर में अटका " (चर्चा अंक-1897) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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