शुक्रवार, 2 मई 2014

मेरा अभिमान

"मेरा अभिमान" यानि मेरी पुत्री रत्ना "उर्वशी" को ढेर सारा प्यार और स्नेह, १५ वीं वर्षगांठ पर … 

जब से तुम्हें पाया,
मायने ही बदल गए … 

जिंदगी की प्यास 
झिलमिल सी आस,
झर झर बातें,
कितना हर्षाते … 
चमचमाती सोच,

एक निर्मल स्रोत …
आकाश का सितारा,
मेरी आधारशिला …
मेरा गुमान,
मेरा अभिमान …

ऐसे जैसे,
जगत के सारे आनंद …
हमेशा हमेशा के लिए ,
मेरी बाबड़ी में आ गए …

जब से तुम्हें पाया,
मायने ही बदल गए …
मायने ही बदल गए …


- निवेदिता दिनकर 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार

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