गुरुवार, 26 सितंबर 2013

क्या होती माँ



 माँ, आज २६/०९/ १३ तेरे जनम दिवस पर, कुछ ….   

"क्या होती माँ" 

पैदल ही दौड़ पडू 
पाने के लिए … 
बस एक अनुभूति , 
एक  अपनत्व,
भीनी सी खुशबू । 
सहला दे 
मेरे माथे को, 
मिल जाऊ 
फिर से 
तुझ में …  
बनकर 
एक बिंदु,  
बिंदु,
एक बिंदु॥ 

- निवेदिता दिनकर 


3 टिप्‍पणियां:

  1. थोड़े में जोड़े
    सुंदर एहसास
    खुशबू बिखरी ज्यूँ
    माँ हो आस-पास

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    1. हाँ, Shikha, आज मन बहुत द्रवित हो रहा था......
      But, I want to say one more thing here"Shikha, You are a wonderful person"!!

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    2. बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ती !

      माँ सदा सहाय!

      कठिनत्तर मुश्किलें आसान हो जाती है
      माँ जब प्यार से तिलक हमें लगाती है

      एक वो ही वो हर जगह मुझे मिले है
      मुझे तेरी माँ अपनी सी नजर आ जाती है

      बेहद मर्मस्पर्शी लेखन !

      नमन अभिव्यकती को निवी !

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