मंगलवार, 7 जून 2016
बुधवार, 25 मई 2016
गुरुवार, 5 मई 2016
खुशबू
यूँ महकी संदली खुश्बू तो फ़िज़ा में पहले कभी न थी,
लगता है
यादों का दराज़ आज खुला रह गया होगा …
- निवेदिता दिनकर
05/05/2016
यादों का दराज़ आज खुला रह गया होगा …
- निवेदिता दिनकर
05/05/2016
फोटो क्रेडिट्स : Urvashi Dinkar
सोमवार, 25 अप्रैल 2016
शनिवार, 9 अप्रैल 2016
कुछ पल
२०११ में लिखी थी, आप भी महक लें ...
खूब थी वह खूबसूरत याद ..........
बेमिसाल बेहिसाब बेकाबू
जाने अनजाने बस गयी
भीनी मंद मंद मीठी मीठी
सराबोर कर के आज ...........
जाने अनजाने बस गयी
भीनी मंद मंद मीठी मीठी
सराबोर कर के आज ...........
जैसे
धुएँ के छल्लों में
पहली कश ...
खूब थी वह खूबसूरत याद ..........
---" कुछ पल जो संजोये है...."
- निवेदिता दिनकर
०९/०४/२०१६
तस्वीर: उर्वशी के हाथों का जादू ...
रविवार, 20 मार्च 2016
मंगलवार, 15 मार्च 2016
बेबुनियाद बातें
हमेशा काम की बातें
या
मतलब की बातें
या
फिर जरूरी बातें
या
ऊँचे दर्जे की बातें ...
कभी बेमतलब की या बेबुनियाद या गैर जरूरी बातें क्यों नहीं?
मसलन
घर में कौन कौन है?
बेटी कितनी बड़ी हो गयी है?
स्कूल जाने लगी की नहीं?
बेटे को बिगाड़ना मत ...
उसकी चोट ठीक हो गयी की नहीं ...
रुकसाना कैसी है?
अब और बच्चें मत पैदा करना !!
अम्मी ने क्या खाना बनाया?
अब्बू की खाँसी कैसी है?
तम्बाकू खाना कब छोड़ रहे हो?
वगैरह वगैरह ...
आज कल यही बे सिर पैर की बातें कर रही हूँ
और
और
फिर जगह जगह इन आधी अधूरी बातों की पैबंद लगा खूब जी रही हूँ ...
बड़ा ही सुकून है, सचमुच ...
- निवेदिता दिनकर
१५/०३/२०१६
सन्दर्भ : राह चलते मजदूरों से बतियाते हुए
तस्वीर: देहरादून में कुछ बच्चें भिक्षुकों के साथ
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