मंगलवार, 7 जून 2016

मुमकिन




कितने सूरज 
कितने चाँद 
कितने आसमान 
कितने समुंदर 
कितने हिमालय 

अपने अंदर 
समेटे हुए है ... 

हाँ ...  
मुमकिन है 

यक़ीनन हम 
मुमकिन है ... 

- निवेदिता दिनकर 
  07/06/2016

तस्वीर : "NGO कर्त्तव्य" के हौसलों के साथ 
          मुझे कुछ सुखद और यादगार क्षण मिलें  ...

बुधवार, 25 मई 2016

छद्म




यह तुम हो या कोई बूँदों सा रूप धरा है 
मेरे लिए तो तुम्हारा  हर छद्म उन्मादपूर्ण है ...

- निवेदिता दिनकर   
  २५/०५/२०१६ 

फोटो क्रेडिट्स : मेरे आँखों से,  ट्रैन से गुजरते हुए भीगी भागी बूँदों के साथ कुछ सुखद पल   

गुरुवार, 5 मई 2016

खुशबू

यूँ महकी संदली खुश्बू तो फ़िज़ा में पहले कभी न थी,
लगता है 
यादों का दराज़ आज खुला रह गया होगा … 

- निवेदिता दिनकर 
  05/05/2016
फोटो क्रेडिट्स : Urvashi Dinkar

सोमवार, 25 अप्रैल 2016

लेबल



सुनो बंधु ,
आज तक तुम मुझे लेबल देते रहे   
'अशुद्ध' का 
और 
प्रतिबन्ध लगाते रहे 
मेरे हर मार्ग पर ...

पर 
अपने को न बचा पाए 
और सिद्ध हुए 

एक अशुद्ध से जना ... 
एक जना ... 

- निवेदिता दिनकर 
  25/04/2016

फ़ोटो क्रेडिट्स: उर्वशी दिनकर  

शनिवार, 9 अप्रैल 2016

कुछ पल


२०११ में लिखी थी, आप भी महक लें   ...

खूब थी वह खूबसूरत याद ..........
बेमिसाल बेहिसाब बेकाबू
जाने अनजाने बस गयी
भीनी मंद मंद मीठी मीठी
सराबोर कर के आज ...........

जैसे 
धुएँ के छल्लों में 
पहली कश ...
खूब थी वह खूबसूरत याद ..........
---" कुछ पल जो संजोये है...."

- निवेदिता दिनकर 
   ०९/०४/२०१६ 
तस्वीर: उर्वशी के हाथों का जादू ...  

रविवार, 20 मार्च 2016

दोस्ती के कितने रंग




दोनों एक बार फिर जन्में  ...

अधूरे थे 
पूरे हो गए ...

शायद 
कोई पुराना हिसाब बकाया था !!

- निवेदिता दिनकर 
   20/03/16 

सन्दर्भ : १६/०३/१६ को एक दुर्घटना में सचमुच हम( मैं और बनी) बाल बाल बचे  
तस्वीर : शैतानी करती "बनी", फ़ोटो क्रेडिट्स : उर्वशी दिनकर  

मंगलवार, 15 मार्च 2016

बेबुनियाद बातें



हमेशा काम की बातें
 या
 मतलब की बातें 
या 
फिर जरूरी बातें 
या
ऊँचे दर्जे की बातें ...  
कभी बेमतलब की या बेबुनियाद या गैर जरूरी बातें क्यों नहीं?

मसलन 
घर में कौन कौन है?
बेटी कितनी बड़ी हो गयी है?
स्कूल जाने लगी की नहीं? 
बेटे को बिगाड़ना मत ... 
उसकी चोट ठीक हो गयी की नहीं ... 
रुकसाना कैसी है?
अब और बच्चें मत पैदा करना !!
अम्मी ने क्या खाना बनाया?
अब्बू की खाँसी कैसी है?
तम्बाकू खाना कब छोड़ रहे हो?
वगैरह वगैरह ... 

आज कल यही बे सिर पैर की बातें कर रही हूँ 
और 
और 
फिर जगह जगह इन आधी अधूरी बातों की पैबंद लगा खूब जी रही हूँ  ...

बड़ा ही सुकून है, सचमुच  ...

- निवेदिता दिनकर     
  १५/०३/२०१६ 

सन्दर्भ : राह चलते मजदूरों से बतियाते हुए  
तस्वीर: देहरादून में कुछ बच्चें भिक्षुकों के साथ