मंगलवार, 22 अगस्त 2017
शुक्रवार, 18 अगस्त 2017
असाधारण लम्हें
पिछले दिनों लखनऊ जाना हुआ, राष्ट्रीय पुस्तक मेले में कविता पाठ हेतु जो मेरे लिए तो हज़ार भाग्य की बात है, पर बोनस के तौर पर एक खुशखबरी और मिली कि बेटे की मीटिंग लखनऊ में १४ तारीख को होने से १३ को वह भी पहुँच रहा है | जानकर, बच्चों सी खुश हो गयी क्योंकि पिछले दो तीन महीने से नौकरी की वजह से वह घर भी नहीं आ पाया था | बस फिर क्या था , मैंने कहा , जिस होटल में तुम रुकोगे मैं भी वहीं रुकूँगी, इस बहाने एक दिन एक रात तुम्हारे साथ रह लूँगी |
मैं दोपहर दो बजे लखनऊ पहुँची, चेंज किया और हम साढ़े तीन बजे तक वेन्यू पहुंच गए | कार में बेटे जी बोलते है , 'मम्मा , प्रैक्टिस कर लो, एक बार '| मुझे उसकी यह बात इतनी अच्छी लगी , फ़ौरन गाड़ी में ही शुरू हो गयी | उसने ख़त्म पर 'थम्ब्स अप' दिखाया, तो मैं बस ...
खैर, बेटा भी अपने नरसी मोंजी कॉलेज, हैदराबाद में मैगज़ीन कमिटी का एडिटर रह चुका है और एक ज़बरदस्त लाइब्रेरी का मालिक, जो उसके आगरा घर में सुशोभित है | बचपन की चम्पक, नंदन, टिंकल, अमर चित्र कथा से लेकर जैकी कॉलिंस, मारिओ प्यूज़ो , अल्फ्रेड हिट्चकॉक , Ayn Rand, एरिच सेगल, अमिश त्रिपाठी और भी कितनें सारे नाम |
रात मुझे लखनऊ की स्पेशलिटी कबाब्स का जायका दिलवाने "रेनेसांस" भी ले गए और मैं बस आनंदित होकर बहती जा रही थी , लहरों से अठखेलियाँ कर ...
एक साधारण सी माँ के लिए इतने असाधारण लम्हें |
और क्या चाहिए ...
काँटों से खींच के ये आँचल
तोड़ के बंधन बांधे पायल
कोई न रोको दिल की उड़ान को
दिल वो चला..
आज फिर जीने की तमन्ना हैआज फिर मरने का इरादा है ,,,
- निवेदिता दिनकर
काँटों से खींच के ये आँचल
तोड़ के बंधन बांधे पायल
कोई न रोको दिल की उड़ान को
दिल वो चला..
आज फिर जीने की तमन्ना हैआज फिर मरने का इरादा है ,,,
18/08/2017
फ़ोटो : लखनऊ
बुधवार, 9 अगस्त 2017
सुन विकास बराला,
आज सब तेरे करतूत को थू थू कर रहे है| तु इतना तो अपडेट होगा ही |
ब्रेकिंग न्यूज़ में जो तेरी फिल्म बन रही है, उस से तो तु वाकिफ़ है |
और तेरी प्यारी माँ ...
और तेरी प्यारी माँ ...
वह बेचारी अपने को कितना कोस रही है , शायद अपने को छुपाये छुपाये फिर रही हो |
तुझे पैदा करने से पहले से लेकर अब तक की सारी बातें सोचती जा रही होगी |
यह भी दिमाग़ में आ रहा होगा, कि, क्या ग़लती हो गयी उस से, कब तु इतना बीमार हो गया ?
इतना ओछा हो गया, इतने गर्त में गिर गया, कि लड़की देखी और विकृति आ गई|
तेरी माँ, घर के और बहु बेटियों के बारे में भी सोचकर दुःखी हो रही होगी कि कहीं ऐसी हवस ने कहीं और भी ... इस ख्याल मात्र से उसकी रूह काँप गयी होगी |
क्यों, आख़िर क्यों किया ? उक्त घटना से एक शाम पहले, या सुबह, या एक घंटा पहले सब कुछ कितना ठीक था ... यह क्या कर डाला ?
सब कुछ, वह बेचारी माँ सोच रही है जिसका तुझे रत्ती भर भी इल्म नहीं, विकास |
अब क्या करेगा ? क्या सोच रहा था, कि तु किसी ऐसे आदमी का बेटा है, और तु कुछ भी कर सकता है, कोई पाप कृत्य करेगा और बच जाएगा,
तो
सुन विकास
अब अपने ही घर में घुट घुट कर मरणासन्न जीने के अलावा तेरे पास और कोई चारा नहीं क्योंकि
बाहर हमारी पाठशाला तेरे इंतज़ार में है |
अच्छा हाँ, हम दिन में, रात में, शाम में, दोपहर में, जब मर्ज़ी हो, जहाँ मर्ज़ी हो, आएंगे जायेंगे, और जो मर्ज़ी हो पहनेंगे |
|| याद रखना, अगली बार तेरे घर में घुस कर मारेंगे ||
- एक और वर्णिका
०९ /० ८ /२०१७
नोट : यह एक खुली चिठ्ठी है और हर उस सिस्टम के लिए है जो बददिमाग, बेअदब , बेईमान है और उस पर नकेल कसने की सख्त जरूरत है |
तस्वीर : मेरे द्वारा , ताजमहल के पास , आगरा
गुरुवार, 27 जुलाई 2017
तेरे बिना
आज 'सिन्दूरी शाम' मासूमियत के रंगो में लिपटी ऐसे ज़मीन पर उतरी कि
उसकी चमक उसकी रौशनी उसकी बंदगी, बेहाल कर गई |
हुआ यूँ कि सड़क पर विचरण करने वाले मेरे चार दोस्त , प्यारे श्वान, में से दो, अपने भोजन के लिए मेरे घर के सामने एकत्र हुए तो देखा देखी एक गाय माते भी आ पहुँची और फिर जम कर "पहले मैं " "पहले मैं " का नारा लगाते हुए मिलजुल कर रोटी खाने लगें, पानी पीने लगें |
डार्विन जी की थ्योरी सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट, स्ट्रगल फॉर एक्सिस्टेंस भी कामयाब दिख रही थी|
नज़ारा बेहद दुर्लभ था, बिना उनसे सहमति लिए, खूबसूरत तस्वीर लूट लिए |
दिल की ख़ुशी देख दिमाग सवालों में उलझ गोता लगाने लगा कि हम मिलजुल कर रोटी कब खाएँगे ?
तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई
शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं
शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं
मंगलवार, 25 जुलाई 2017
मुठ्ठी भर ...
कुछ बातों / खबरों से मैंने अपने अंदर अवसाद को उतरते महसूस किया है | वह खबर, हादसा , घटना कभी कभी मेरे अंदर इतना लाचारी भर देती है, कि मुझे अपने आप से ही कष्ट होने लगता है | जरूरी नहीं, वह घटना मेरे साथ या मेरे अपनों के साथ घटी हो पर बस बेबस कर जाती है |
ऐसे में गीतों या फिल्मों या अपनी पालतू डॉगी या कुछ और डॉगी जो सड़क पर घुमते है और लगभग पालतू नुमा से हो गए है से बड़ा सहारा मिलता है |
कभी तो हवा में ही कुछ भाव कच्चा पक्का उकेर देती हूँ और सुकून पा लेती हूँ | अब हर वक़्त कागज़ कलम तक पहुँचना कहाँ हो पाता है |
माँ बताती है , बचपन में राह चलते कुत्ते के बच्चे , बकरी के बच्चें, चिड़ियों के बच्चे घर में उठा लाती थी और माँ से ज़िद करती थी कि इनको पाल लो |
आसपास के घरों में अब कहीं मेरी बचपन वाली रज़िया आंटी नहीं दिखती , न ही पाठक आंटी , न ही गोयल आंटी न ही कुलवंत आंटी बल्कि आस पास जाति और मज़हब और सोच दिखती है या दिखती है फॉरेन रिटर्न्ड या मर्सिडीज़/ बी एम् डब्लू वाली कोठी या ए सी/ विदेशी / स्वदेशी के मद से प्रदूषित होता वातावरण |
ओह , कब तक ... चलो एक बार फिर से ... ~ ~ ~
गुफा, नदी , झील , प्रकृति और प्रकृति ...
पाषाण युग कैसा रहेगा ??
बस, मुठ्ठी भर ...
- निवेदिता दिनकर
२५/०७/२०१७
फोटो : एक मुठ्ठी शाम, लोकेशन आगरा , ताज महल के पास
शनिवार, 17 जून 2017
कवितायें
एक से बढ़कर एक
कवितायें
नायाब, बेमिसाल, असाधारण ...
प्रेम से भरी हुई
ज़िन्दगी से लबरेज़
शहद में डूबी
शहनाई को मात करती नवेली धुन जिसकी
चिड़ियों की मासूम कलरव करती
ग़ज़ल नुमा
निष्कलंक
संपन्न
किसको पढ़े
किसकी आरती उतारें
प्रशांत महासागर से भी गहरें
रुई मलमल से थोड़ी ज्यादा मुलायम
आह जैसी चाह ...
वातानुकूलित कमरों से निकली
कवितायें
शायद ऐसी ही होती है !!
- निवेदिता दिनकर
१७/०६/२०१७
तस्वीर : तपती धूप तकती पेट
शनिवार, 10 जून 2017
मेरी नायिका - 8
एक मेहनतकश खुद्दार माँ की सफलता यूँ हासिल हुई जब उसकी मेहनती बुद्धिमान मेधावी बेटी यू पी बोर्ड 2017 की बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स लेकर ७५ % अंक से उत्तीर्ण हुई |
ख़ास बात यह कि इस बेटी की माँ कोई स्कूल कॉलेज कभी नहीं जा सकी और मेरे घर के काम काज में पिछले कई सालों से हाथ बटांती है | पिता इ रिक्शा चलाते है | यू पी बोर्ड की दसवीं में ८५ % पहले ही ला चुकी है |
इस हुनर और जूनून को हमारा सलाम मिलना ही चाहिए |
इस हुनर और जूनून को हमारा सलाम मिलना ही चाहिए |
मेरी और दिनकर की अपेक्षा है कि मैं इस रानी बेटी " रेणु कौर " को आगे चलकर सिविल सर्विसेज में जरूर बिठाऊँ | आगे जो रब राखा ...
- निवेदिता दिनकर
१०/०६/२०१७
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