बुधवार, 9 अगस्त 2017

सुन विकास बराला,

सुन विकास बराला,

आज सब तेरे करतूत को थू थू कर रहे है| तु इतना तो अपडेट होगा ही | 
ब्रेकिंग न्यूज़ में जो तेरी फिल्म बन रही है, उस से तो तु वाकिफ़ है |  
और तेरी प्यारी माँ ... 

वह बेचारी अपने को कितना कोस रही है , शायद अपने को छुपाये छुपाये फिर रही हो | 
तुझे पैदा करने से पहले से लेकर अब तक की सारी बातें सोचती जा रही होगी | 
यह भी दिमाग़ में आ रहा होगा, कि, क्या ग़लती हो गयी उस से, कब तु इतना बीमार हो गया ? 
इतना ओछा हो गया, इतने  गर्त में गिर गया, कि लड़की देखी और विकृति आ गई| 
तेरी माँ, घर के और बहु बेटियों के बारे में भी सोचकर दुःखी हो रही होगी कि कहीं ऐसी हवस ने कहीं और भी ... इस ख्याल मात्र से उसकी रूह काँप गयी होगी | 

क्यों, आख़िर क्यों किया ?  उक्त घटना से एक शाम पहले, या सुबह, या एक घंटा पहले सब कुछ कितना ठीक था ... यह क्या कर डाला ?
सब कुछ, वह बेचारी माँ सोच रही है जिसका तुझे रत्ती भर भी इल्म नहीं, विकास | 

अब क्या करेगा ? क्या सोच रहा था, कि तु किसी ऐसे आदमी का बेटा है, और तु कुछ भी कर सकता है, कोई पाप कृत्य करेगा और बच जाएगा, 
तो 
सुन विकास     

अब अपने ही घर में घुट घुट कर मरणासन्न जीने के अलावा तेरे पास और कोई चारा नहीं क्योंकि 
बाहर हमारी पाठशाला तेरे इंतज़ार में है | 
अच्छा हाँ, हम दिन में, रात में, शाम में, दोपहर में, जब मर्ज़ी हो, जहाँ मर्ज़ी हो, आएंगे जायेंगे, और जो मर्ज़ी हो पहनेंगे |  

|| याद रखना, अगली बार तेरे घर में घुस कर मारेंगे ||    

- एक और वर्णिका    
  ०९ /० ८ /२०१७

नोट : यह एक खुली चिठ्ठी है और हर उस सिस्टम के लिए है जो बददिमाग, बेअदब , बेईमान है और उस पर नकेल कसने की सख्त जरूरत है | 
तस्वीर : मेरे द्वारा ,  ताजमहल के पास , आगरा  

गुरुवार, 27 जुलाई 2017

तेरे बिना





आज 'सिन्दूरी शाम' मासूमियत के रंगो में लिपटी ऐसे ज़मीन पर उतरी कि 
उसकी चमक उसकी रौशनी उसकी बंदगी, बेहाल कर गई |  

हुआ यूँ कि  सड़क पर विचरण करने वाले मेरे चार दोस्त , प्यारे श्वान, में से दो, अपने भोजन के लिए मेरे घर के सामने एकत्र हुए तो देखा देखी एक गाय माते भी आ पहुँची और फिर जम कर "पहले मैं " "पहले  मैं " का नारा लगाते हुए मिलजुल कर रोटी खाने लगें, पानी पीने लगें | 

डार्विन जी की थ्योरी सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट, स्ट्रगल फॉर एक्सिस्टेंस भी कामयाब दिख रही थी| 
नज़ारा बेहद दुर्लभ था, बिना उनसे सहमति लिए, खूबसूरत तस्वीर लूट लिए | 

दिल की ख़ुशी देख दिमाग सवालों में उलझ गोता लगाने लगा कि हम मिलजुल कर रोटी कब खाएँगे ?  

तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई
शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं
    
 - निवेदिता दिनकर 

  २७/०७/२०१७ 





मंगलवार, 25 जुलाई 2017

मुठ्ठी भर ...





कुछ बातों / खबरों से मैंने अपने अंदर अवसाद को उतरते महसूस किया है | वह खबर, हादसा , घटना कभी कभी मेरे अंदर इतना लाचारी भर देती है, कि मुझे अपने आप से ही कष्ट होने लगता है | जरूरी नहीं, वह घटना मेरे साथ या  मेरे अपनों के साथ घटी हो पर बस बेबस कर जाती है | 

ऐसे में गीतों या फिल्मों या अपनी पालतू डॉगी या कुछ और डॉगी जो सड़क पर घुमते है और लगभग पालतू नुमा से हो गए है से बड़ा सहारा मिलता है | 
कभी तो  हवा में ही कुछ भाव कच्चा पक्का उकेर देती हूँ और सुकून पा लेती हूँ | अब हर वक़्त कागज़ कलम तक पहुँचना कहाँ हो पाता है | 

माँ बताती है , बचपन में राह चलते कुत्ते के बच्चे , बकरी के बच्चें, चिड़ियों  के बच्चे घर में उठा लाती थी और माँ से ज़िद करती थी कि इनको पाल लो | 
आसपास के घरों में अब कहीं  मेरी बचपन वाली रज़िया आंटी नहीं दिखती , न ही पाठक आंटी , न ही गोयल आंटी न ही कुलवंत आंटी बल्कि आस पास जाति और मज़हब और सोच दिखती है  या दिखती है फॉरेन रिटर्न्ड या मर्सिडीज़/ बी एम् डब्लू वाली कोठी या ए सी/ विदेशी / स्वदेशी के मद से प्रदूषित होता वातावरण | 

ओह ,  कब तक ...     चलो एक बार फिर से ...           ~ ~ ~
 गुफा, नदी , झील , प्रकृति और प्रकृति  ...  
पाषाण युग कैसा रहेगा ??

बस, मुठ्ठी भर  ...  

- निवेदिता दिनकर 
  २५/०७/२०१७
फोटो : एक मुठ्ठी शाम, लोकेशन आगरा , ताज महल के पास 

शनिवार, 17 जून 2017

कवितायें








एक से बढ़कर एक 
कवितायें 
नायाब, बेमिसाल, असाधारण  ...   

प्रेम से भरी हुई 
ज़िन्दगी से लबरेज़ 
शहद में डूबी 
शहनाई को मात करती नवेली धुन जिसकी   
चिड़ियों की मासूम कलरव करती 
ग़ज़ल नुमा 
निष्कलंक
संपन्न

किसको पढ़े 
किसकी आरती उतारें 
प्रशांत महासागर से भी गहरें 
रुई मलमल से थोड़ी ज्यादा मुलायम 
आह जैसी चाह  ...  

वातानुकूलित कमरों से निकली 
कवितायें 
शायद ऐसी ही होती है !!

- निवेदिता  दिनकर
  १७/०६/२०१७ 


तस्वीर : तपती धूप तकती पेट 

शनिवार, 10 जून 2017

मेरी नायिका - 8




एक मेहनतकश खुद्दार माँ की सफलता यूँ हासिल हुई जब उसकी मेहनती बुद्धिमान मेधावी बेटी यू पी बोर्ड 2017 की बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स लेकर ७५ % अंक से उत्तीर्ण हुई |
ख़ास बात यह कि इस बेटी की माँ कोई स्कूल कॉलेज कभी नहीं जा सकी और मेरे घर के काम काज में पिछले कई सालों से हाथ बटांती है | पिता इ रिक्शा चलाते है | यू पी बोर्ड की दसवीं में ८५ % पहले ही ला चुकी है |
इस हुनर और जूनून को हमारा सलाम मिलना ही चाहिए |
मेरी और दिनकर की अपेक्षा है कि मैं इस रानी बेटी " रेणु कौर " को आगे चलकर सिविल सर्विसेज में जरूर बिठाऊँ | आगे जो रब राखा ...

 - निवेदिता दिनकर 
   १०/०६/२०१७ 

बुधवार, 24 मई 2017

प्रिय अभिभावकों,




प्रिय अभिभावकों,

इन दिनों हर चैनल, वेब साइट्स , घर, अड़ोस पड़ोस पर बारहवीं के रिजल्ट निकलने का ही इंतज़ार है|
मेरे घर में भी बेसब्री है | मेरी बेटी उत्कंठित है, थोड़ी व्याकुल थोड़ी उत्सुक | यह जाहिर सी बात है |
पर दोस्तों , कुछ चीज़ों का ख़ास ख्याल रखना होगा एक माँ, एक पिता के हैसियत से |
१. घर पर अच्छा ख़ुशनुमा माहौल रखें |
 २. खूब हँसे, बोले, चहके |
३. खाने पीने में बच्चे के स्वाद का ध्यान रखा जाए और खाने के टेबल पर साथ बैठकर खाये |
४. दोस्तों से बात करने को बोले और उनसे मिलने जरूर दिया जाये |
५. बात बात पर टोका टाकी तो कतई न करें |
६. घर में छोटे छोटे कामों में हिस्सेदारी दे और रसोई में भी मदद ले, मसलन सलाद कटवाना, डाइनिंग टेबल पर प्लेट्स , कटोरी रखवाना , आदि |
७. सुबह जल्दी न उठने के लिए डाँटे नहीं, प्यार से उठाईये |
८. ऑनलाइन छोटी मोटी शॉपिंग भी करने दे |
९. अगर घर पर पेट्स है तो उसे घूमाने ले जाये , उसके साथ खेलें |
१०. सबसे जरूरी , समझाते रहें कि रिजल्ट ही है , कोई हौआ नहीं | पूरी जिंदगी बाकी है |
११. एक परसेंट रिजल्ट अच्छा न भी आये तो क्या हुआ | बस स्ट्रांग रहो , बोल्ड रहो, हम है तुम्हारे साथ| आपका इतना कहना ही उसके लिए नयी ऊर्जा का संचार करेगा |
चलिए , मुझे भी अपनी बेटी के साथ शॉपिंग पर जाना है , यूँ ही थोड़ी मस्ती करेंगे हम माँ और बेटी
खुशियों के पलों को बस यूँ ही संजोते रहिये ...
देखिएगा, कितना सुकून है ...
- निवेदिता दिनकर
  २४/०५/२०१७

सोमवार, 22 मई 2017

हलाला ?




मेरे घर में वाल पेंटिंग करने वाले बबलू ने अचानक दोपहर ३ बजे बताया कि उसे अब घर जाना है, क्योंकि उसकी बहन का आज निकाह है | मैं चौंकी क्योंकि उसने मुझे सुबह से  जिक्र तक नहीं किया था |  मैंने कहा , अरे, जरूर जाओ लेकिन पहले क्यों नहीं बताया ? तुमसे क्या काफी छोटी है?  तो वह बोला  कि असल में उसका निकाह दोबारा हो रहा है |  
अच्छा ... 

हाँ, बबलू का नाम इसरार भी है| 

फिर उसने पूरी बात बतायी कि उसके बहन का  निकाह पहले वाले शौहर के साथ हो रहा है और दूसरा निकाह जिस आदमी के साथ हुआ था वह निकम्मा और आलसी निकला | 

जब पूछा, पहले वाले से तलाक़ क्यों हुआ था ? तब बताया पहला वाला शराबी था , बहुत परेशान करता था | तब फिर से पहले वाले से क्यों?  क्योंकि अब वह पहले से सुधर गया है और हमारे पापा भी नहीं रहे | तो एक आदमी तो घर में चाहिए| और बच्चें ? हाँ, पहले से एक बेटी दुसरे से दो बेटियाँ |   

यानि यह तीसरा निकाह था ...

अच्छा, "हलाला " शब्द से वह अनभिज्ञ था लेकिन यह कुप्रथा उसके समाज में प्रथा के रूप में जड़ो में व्याप्त दिखीं | और उस से बात कर के लगा जैसे ... जाने दीजिये अब |     

मुझे ऐसे लॉजिक समझ में तुरंत आ गए और शायद आपको भी  ...   

- निवेदिता दिनकर 
  २२/०५/२०१७ 
  
तस्वीर : इस छोटी सी बच्ची से मुलाक़ात ताजमहल परिसर में हुई थी |