सोमवार, 20 मार्च 2017

बेटी बनाम बहू



- कुछ दिनों पहले वृद्धाश्रम जाना हुआ । मेरी मुलाक़ात वहाँ एक अम्मा से हुई । काफी चुपचाप खड़ी थी। 
मुझे बताया गया कुछ दिनों पहले एक रात लगभग २ बजे उनका  बेटा  उन्हें वृद्धाश्रम  के गेट पर छोड़कर चला  गया । अम्मा को  झूठ बोलकर लखनऊ से लाया गया था। 

- बेटे द्वारा पिटे जाने से क्षुब्ध माँ वृन्दावन चली गयी।  पहले पिता अपने बेटे की तरफदारी करता था , अब शायद वह भी पत्नी के साथ वृन्दावन में है।

क्या ऐसी करतूत केवल बेटे ने ही की होगी ?
बेटियों, जब तुम बहू बनती हो, तब सास माँ नहीं होती, क्या ?    

 - निवेदिता दिनकर 
   20/03/2017

फ़ोटो : उर्वशी दिनकर , लोकेशन - मसूरी 



शनिवार, 18 मार्च 2017

असाधारण बसंत






कभी चित्रकार की तूलिका में, 
कभी लुहार के हथौड़े में, 
कभी रेहड़ी वाले के ठेल में, 
कभी जीवन के रेलमपेल में 

बसंत अगड़ाई लेता रहा  ...  
निशंक आह्वान देता रहा  ... 

कभी उस शिशु के आँखों में 
कभी उस माँ के चेहरे पर  ...  
जो बड़े चाव के साथ 
सड़क किनारे करा रही स्तन पान  ...  

तो कभी उस पिता के साँसों में 
जो दुर्गन्ध नाली की सफाई रहा कर 
ले परिवार का पोषण अपने सर  ...   

चाहे हो पूस की सर्द रात 
या हो जेठ की दुपहरिया 

बसंत गुनगुनाये निकलता रहा 
व्याकुल आह्वान देता रहा  ... 

लेकिन, 
इस छोटे बारह साल के आँखों में नहीं है कोई बसंत, 
न कोई बेफिक्री, न ही कोई उतावलापन  
कर गया सवाल, बारम्बार, उसका भोलापन 

रे मन,  
अब तु ही बता, क्या आदि क्या अंत  
 क्यों दे रहा अधूरा हेमंत, अपूर्ण बसंत 
बसंत अनवरत बहता  रहा 
निःशब्द आह्वान देता रहा 

बसंत अनवरत बहता  रहा 
निःशब्द आह्वान देता रहा 

- निवेदिता दिनकर  

फ़ोटो : इस प्यारी सी बातून लड़की का नाम है, सपना, जिस से मेरी मुलाक़ात एक बाजार में हुई जो फुल कॉन्फिडेंस के साथ अपना सामान बेच रही थी।  यहीं इस मासूम का बसंत है|  

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

सीढ़ियाँ



एक खिंचाव सा महसूस किया, इस तस्वीर को देख कर ।
जाने क्यों लगा जैसे बरसों इन सीढ़ियों पर बैठी रही हूँ । यहाँ से गुजरते हवाओं से बातें करी हो , चाँदी सी झिलमिलाती इस झील से कोई पुरानी मुलाक़ात हो, अपनी ख्वाइशें  इन सबसे साँझा की हुई हो।   

बीती हुई बातें, रीती हुई रातें सताती बहुत है। कई अनकही कहानियाँ जो थामे होती है। 
गीली मिट्टियाँ और उस पर कदमों के निशां आज भी दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे 
कोई मुझे पुकार रहा है, और, और मैं नंगे पाँव दौड़ी चली जा रही हूँ  ...    

 - निवेदिता दिनकर 

फ़ोटो क्रेडिट्स : उर्वशी दिनकर  

बुधवार, 25 जनवरी 2017

बिछोह से प्रेम



हाँ, मुझे प्रेम पसंद है 
प्रेम में पड़ना भी 
और
 प्रेम को पढ़ना भी 
लेकिन 
सबसे ज्यादा पसंद 
 बिछोह

उस
'बिछोह' से 
शिद्दत से प्रेम है मुझे 

क्योंकि 
इसकी  
महक और चहक
धमक और गमक    
वेग और आनंद 
गूँज और गाँठ 

मुझे 
मीरा मय  
कर जाते है ... 

- निवेदिता दिनकर   
  

खूबसूरत शाम, ताज और एक दीवानी 

तस्वीरों में क़ैद करने की गुस्ताख़ी मेरी 









गुरुवार, 19 जनवरी 2017

उस दिन ...



उस दिन ...
  
उस दिन 
जैसे ही अपने 
हॉस्टल के रूम में घुसी 

मुझे मेरे 
रूम मेट ने 
इशारे से 
रूम की खिड़की 
के बाहर 
देखने को कहा 

मैंने ज्यों ही 
बाहर की ओर 
झाँका 

एक व्यक्ति 
हाथ हिला हिला कर 
भद्दे इशारे 
कर रहा था  ... 

जैसे ही 
मैं 
ज़ोर से चीखी 

"अबे, दो कौड़ी के" 
"तु वहीं रूक" 

सुनकर 
सरपट भागा  
ऐसे, जैसे 

भूत देखा हो ...

मेरी वह प्यारी रूम मेट
मिजोरम  
से, 
मेरे गले लग गयी 
बोली, 
थैंक्स मेरा साथ देने के लिए 


मैं कितनी देर उस से चिपकी रही, नहीं मालूम  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  १९/०१/२०१७ 

नोट : उपरोक्त घटना मेरे साथ घटी थी। 
मिजोरम में साक्षरता का दर भारत में सबसे ज्यादा ९१.०३% है और केवल नैन नक्श के आधार पर, कुछ अति इंटेलीजेंट लोग उन्हें भारतीय ही नहीं मानते ।    
यह तस्वीर मेरे द्वारा खींची गयी है , "पूजा की थाली" 


बुधवार, 4 जनवरी 2017

पूस की एक रात




हर रात एक कहानी बुनती हूँ 
या 
हर कहानी में एक रात बुनती हूँ  

मगर, 
आज की रात 
एक सर्द रात  
निस्तब्ध 
सफ़ेद 

अकेली   ... 
अधूरी  ... 
अलबेली  ... 
अनोखी  ... 
अलौकिक  ... 

हल्कू, जबरा
आज भी वैसे ही,  
बिलकुल भी नहीं बदले ...    

कुछ नहीं बदला  ... 
  
- निवेदिता दिनकर 
  04/01/2017

तस्वीर : मेरे द्वारा "पूस की अलौकिक रात", लोकेशन : आगरा  

शनिवार, 17 दिसंबर 2016

ज़िद्दी




ज़िद्दी ज़िद्दी ज़िद्दी 

हाँ हूँ 
यार, पगला जाती हूँ ...

आजकल 
बेकाबू टाइप हो जाती हूँ। 
कभी 
बहुत रोने का मन करता है |

अंदर सिसक रही हो जैसे  ... 
कच्चे घड़े को वापिस 
मिट्टी बनना हो वैसे  ... 

और
अब 

चीख चीखकर रोना चाहती है। 

रोने दो न  ... 
मिट्टी बनने दो न  ... 

- निवेदिता दिनकर  
  17/12/2016

तस्वीर : उर्वशी के आँखों देखी, लोकेशन : दिल्ली हाट