रविवार, 11 दिसंबर 2016

प्यार में कभी कभी




जब मामूली हवा के झोकें के छुवन से सिहरन हो जाये , 
आप प्यार में है,
जब तन्हाइयों में अपने अंदाज़ से मुस्कान तैर जाये, 
आप प्यार में पड़े है, 
जब सामने से 'वो ' आ कर भी अपने में खोये रह जाये,
आप प्यार के परे है, 
  
जब आँच पर चढ़ी  भिन्डी जल कर ख़ाक हो जाये,
आप प्यार के सिरमौर है ...

- निवेदिता दिनकर 
  ११ /१२/२०१६ 

फोटो क्रेडिट्स : तुम्हारे लिए " दिन " मेरे दिल के आँखों से , लोकेशन मसूरी 

रविवार, 6 नवंबर 2016

मेरी नायिका - 6



कुछ दिनों पहले एक बच्ची " प्रीति " से मुलाक़ात हुई जो खूब बातें बनाती है, हँसती है, लड़ती है, मगर कमर के नीचे का हिस्सा शिथिल रहता है। उम्र १२ साल। बच्ची के पापा कहते है कि वह पैदा ही ऐसी हुई है। पापा सफाई कर्मचारी और माँ एक हॉस्पिटल में आया है। 
उस दिन उसको एक टेडी बियर और स्वीट्स दिया तो बहुत ही खुश हुई और अब मैंने उसको ड्राइंग शीट और कलर पेंसिल दिया .... और वह पढ़ेगी भी | 


क्यों मुस्कराती हो इतना, तुम?

और 
सब तिजोरियाँ भर कर भी 
कैसे 
मायूस 
है 
हम ...  

कैसे इतनी जान है, तुम में ?  

और  
कितने
खोखले  
बेजान 
है 
हम ... 

कैसे हँसती हो खिलखिलाकर, तुम?

और 
क्या कुछ न होते हुए 
भी 
ऐंठन   
के मारे 
हँस भी 
न पाते 
है 
हम ...

 वक़्त की तो फ़ितरत होती है करवट बदलने की, 
 क्या मालूम कब कौन सी करवट कोई जड़वत का कारण बन जाए 

सोचना जरा  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  ०६/११/२०१६ 

तस्वीर : प्रीती अपने टेडी के साथ 

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

सुन रहे हो, न



सुन रहे हो, न 
आज फिर तुम पास नहीं हो 
और 
कल करवा चौथ है। 

यूँ तो ऐसी कोई बात नहीं ... 
मुझे तुम याद तो भरपूर आओगे 
परन्तु ,       
आज सवेरे की हमारी चाय
उफ़, 
जब
आधी चाय मैंने गुस्से में छोड़ दिया 
और 
तुम बस सोच में कि 
अब कैसे ?

अच्छा, पिछली रात की साथ लॉन्ग ड्राइव,
और हाँ ,
तुम्हारे फ़ोन पर 
मेरी नौ मिस्ड कॉल 
पूछने पर,
कि यार, मोबाइल साइलेंट पर था। 

जान बूझकर 
मुझसे टकरा कर निकलना  ... 
मेरे गालों के पास तक आकर, 
फिर 
कानों में कुछ भी फुसफुसा देना  ... 

बाथरूम में 
गीली तौलिया,
औंधा पड़ा तकिया, 
अखबार का बेतरतीब पूरे बिस्तर पर पसरे होना,

मेरे 
करवे में क्या कुछ नहीं है  ......  
 बस,
अब बारी तुम्हारी,  

चौथ क्या दोगे ?

- निवेदिता दिनकर 
  १८/१०/२०१६ 

दोस्तों के नाम सांझा  ..कुछ कभी न भूलने वाली हमारी तस्वीरें   <3

सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

अरे ओ चाँद



अरे ओ चाँद,
तु जितना खूबसूरत कल शरद पूनो को था, उतना आज भी अमृत बरसा रहा था और सच मान, आज भी भीगने से, मैं उतनी ही पल्लवित हुई। 
तेरे प्रेम से कोई न बच पाया 
और 
मैं ... 

मैं  तो ठहरी वावरी  ...
ठगी ठगी सांवरी ...
न कोई देस, न कोई धर्म 
है पावन प्रीत री ...

- निवेदिता दिनकर 
  16/10/2016
  
फ़ोटो  क्रेडिट्स : आज वॉक पर यह मनोरम दृश्य और मेरी ललचायी आँखे ...  

सोमवार, 19 सितंबर 2016

तमन्ना



एक फौजी के दिल की बात, जब वह दूर बैठे अपने परिवार के लिए सोचता है  ...  

तमन्ना है,
कुछ लम्हें मिले ...
तमन्ना है,
कुछ लम्हें और मिले ...
तमन्ना है, 

कुछ लम्हें और साथ मिले ...
तमन्ना है,
कुछ लम्हें साथ साथ मिले ... 


- निवेदिता दिनकर
  १९/०९/२०१६


तस्वीर: उर्वशी की एक शानदार कलाकृति  

बुधवार, 14 सितंबर 2016

शहरी



हुस्ने इत्तिफ़ाक़ से,
ज़िद्दे पूरी होती गई और शहरी होते गए  ... 

पाश पाश होते रहे और पाक़बाज़ी खोते गए ...         

- निवेदिता दिनकर      
  १४/०९/२०१६  

हुस्ने इत्तिफ़ाक़ -  सौभाग्य से, सुयोग, luckily 

पाश पाश - टूट कर चूर चूर हो जाना , broken in pieces 

पाक़बाज़ी - शुद्धता , सच्चरित्रता, purity 

तस्वीर: मेरी नज़र से 'पत्ती पर रुकी एक बूँद', लोकेशन : मेरा घर, आगरा    
                 

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

बहेलिया



हमारी बेहिजाबी को बेअदबी का नाम न दे,
सुना है 
बहेलिया हिजाब में ही आता है ... 



- निवेदिता दिनकर

तस्वीर: दिनकर सक्सेना के सौजन्य से, लोकेशन : CK मार्किट , कोलकाता