शनिवार, 23 जनवरी 2016

मोहब्बत



"मोहब्बत करते है!!" 
नहीं मालूम ...
"मैंने मोहब्बत किया" ... 
नहीं मालूम ...

सिवाय
तुम्हारा हसीन साथ
या सारंग का गात
जैसे पुष्कर सा सुकून
या गरल धारण शम्भू
जैसे मनमौजी बाताश 
या सरि सा एहसास

जैसे अकूत दौलत
या मन महोत्सव
जैसे लहरों पर अठखेलियाँ
या महकती मंडलियां
जैसे ग़ज़ल सी चंचल ख्वाइश
या छौना सी आजमाइश
जैसे अलंकृत दिनकर
या कनक सा कलेवर

और
साझे
अनगिनत लम्हें ...

- निवेदिता दिनकर 
  21/01/2016
तस्वीर : उर्वशी की आँखों से, "मोहब्बत", लोकेशन धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश   

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

और जब ...



अजीब सनक है 
या 
सनकी कहो 

न भेड़चाल पसंद 
और 
न भीड़ वाले काम ...

फितरत ही नहीं है ...
कही जाती हूँ 
हठी 
बेअदब 
बेशर्म 

जब रुकना चाहती हूँ 
कहा जाता है 'चलो'

और जब चलना चाहती हूँ 
कहा जाता है 'रुको '

जब बात करने का मन होता है 
तो 'कितना बोलती है'! 

और 
जब खामोश 
तो 
ज़लज़ला ... 

- निवेदिता दिनकर 
   १५/०१/२०१६ 

तस्वीर : उर्वशी की आँखों से 'स्फुटित' 

मंगलवार, 12 जनवरी 2016

मेरी नायिका - 5



मुँह अँधेरे निकल आना 
चाहे  हो कोई भी महीना 
जल्दी जल्दी पेट में 
कुछ डाल

हाथों में सीकों की झाड़ू 
पैरों में रबर की चप्पल 
बस, चल पड़ना ... 

आज बोली,
मेडीकल कॉलेज जाना है 
बच्चे का x ray होना है 
कुछ पैसे दे दीजिये 

पूछने पर बताया 
एक मरखन्नी गाय ने उसके दो साल के बच्चे के सीने पर पाँव रख दिया 
गंभीर चोटें आयी है। 
कहते हुए रोने लगी ...

मेरी आज की दिलेर नायिका 
नाम मिथिेलेश 
उम्र करीबन तीस बत्तीस साल 
काम सड़कों पर झाड़ू लगाना, कूड़ा बीनना ...

और हम 'अभियान अभियान' खेल रहे है!! 

- निवेदिता दिनकर
  12/01/2016

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

मेरी नायिका - 4




बस्ते से निकाल 
अपनी कॉपी ... 
लिखने लगी वह 
ए बी सी डी  ... 

शीत से 
पाँव हो रहे थे बिलकुल ठण्डे ठण्डे 
मगर 
बेख़ौफ़ अरमान चल पड़े थे हौले हौले 

देख, 
तुरंत 
दो जोड़ी मोज़े दिए, 
अरे, ओ हौसलों से भरपूर नन्हें से दीये  ... 
उसने पहना फूर्ती से एक जोड़ी
और 
दूसरा बस्ते में रख दिया  

आह !!

मेरी आज की खूबसूरत नायिका 
नाम वन्दना 
उम्र आठ बरस 
पापा ट्रैक्टर चलाते है  ...    
माँ घर घर काम करती है   ... 

- निवेदिता दिनकर 
   ३१ /१२/२०१५ 

तस्वीर : "एक नन्हीं दीया "

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

मेरी नायिका - 3



आज की शाम ... 
सेब, संतरे, चीकू, अनार 
ठेल बिलकुल भरी हुई 

बराबर से एक और ठेल 
अदरख, लहसुन, हरी मिर्च की 

और ठेल के बराबर से, 
कुछ सहमी
कुछ मुस्काती    
दो जोड़ी चमकीली आँखे ... 

अरे, इतनी ठण्ड में ?
घर जाओ  ...

बराबर से फल वाला धीरे से कुछ बोला 
" माँ  " नहीं है।

सहसा दिल एकदम बैठ गया  ... 
आह!!  
बेहद दुखद  ... 

 मैंने दो दो सेब दोनों के हाथों में रख दिए ... 

मेरी आज की 
दो नन्हीं नायिकाएँ  ... 
एक दूजे से चिपकी खड़ी हुई 
उम्र मात्र आठ - नौ बरस 

-  निवेदिता दिनकर 
   २२/१२/२०१५ 
फ़ोटो : मेरी नज़र से : मसूरी की एक हलचल भरी शाम 

सोमवार, 21 दिसंबर 2015

मेरी नायिका - २




बहुत प्यारी और नेक सी सुबह थी। 
मीठी मीठी मुस्कराहट संजोऐ 
खिला खिला चेहरा 
कोहरे की चादर ओढे,   
दिसम्बर की कड़क ठण्ड में भी गर्माहट का आभास देती हुई ... 


मेरी आज की नायिका,  
एक पाँच सितारा होटल में लेडीज वाश रूम में ड्यूटी देते हुए 
सत्रह वर्षीय रजनी  ... 

- निवेदिता दिनकर 
  21/12/2015   

तस्वीर : मेरी आँखों से - कोहरे में लिपटी दार्जिलिंग की एक सुबह  

मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

नायिका




वह जब भी मेरे घर के सामने वाली सड़क से गुजरती है, अच्छा लगता है । 
वह जब भी मुस्कुराकर आँखों आँखों से कुछ कहकर निकल जाती है, अच्छा लगता है । 
वह जब भी रुक कर फिर आगे बढ़ जाती है, अच्छा लगता है।

एक दिन आख़िरकार मैंने उसे रोका, और अपनी एक शाल दिया, तो कहती है दीदी, आपने बहुत काम की चीज़ दी है, इस सर्द में खूब काम आयेगी।

ऐसी नज़र अंदाज़ करने वाली घटना या मामूली सी बात कब गहरा चोट कर जाये या फिर कब सबक सिखा जाये या फिर कब रूह से रूह मिला जाये, यह कोई नहीं बता सकता ॥     

यह मेरी नायिका है, मेरी सब्ज़ी वाली  ... 

- निवेदिता दिनकर    
  15/12/2015   

फोटो :" कुछ रौशन दिये" , मेरी नज़र से